वाक्य विचार-परिभाषा उसके भेद उसके विशेषताएँ(vakya vichar)

वाक्य विचार-परिभाषा उसके भेद उसके विशेषताएँ(vakya vichar)

 
वाक्य विचार-परिभाषा उसके भेद उसके विशेषताएँ(vakya vichar)
वर्ण विचार  , शब्द विचार ,  साथ  वाक्य विचार का  भी हिन्दी व्याकरण में बहुत महत्व है।
 वाक्य शब्दों का समूह होता है जिस से सार्थक अर्थ मिलता हो। जब किसी से बात करनी
हो तो वाक्य की आवश्यकता पड़ती है  हालांकि वाक्य के प्रत्येक शब्द का अपना अर्थ

 होता है।  वाक्य में आयें प्रत्येक शब्द मिलकर  पूरा अर्थ प्रकट करता हैं।

वाक्य  के   परिभाषा -:   (vaky ki paribhasha)

शब्दों  का ऐसा समूह  जो विचारों को पूर्ण रूप से व्यक्त करता हो वाक्य कहलाता है। 
वाक्य  भाषा की सबसे छोटी इकाई है , परन्तु विचारों एवं भावों को पूर्ण रूप से व्यक्त  
करती वाक्य कहते  है।                                                                                        
 शब्दों का समूह जो क्रम के अनुसार सजा हो और पूर्ण अर्थ प्रकट करता हो वाक्य       
कहते है ।                                               
वाक्य विचार-परिभाषा उसके भेद  उसके विशेषताएँ(vakya vichar)
वाक्य विचार-परिभाषा उसके भेद उसके विशेषताएँ(vakya vichar)
वाक्य विचार-परिभाषा उसके भेद-:

वाक्य की विशेषताएं निम्नलिखित है  -: 

(1) सार्थकता  (2) योग्यता (3) आकांक्षा  ( 4 ) निकटता या आसक्ति  

(5) पद – क्रम (6) अन्वय 

(1) सार्थकता – वाक्य में प्रयोग होने वाले सभी पदों का कोई  सार्थक अर्थ होना चाहिए
निरर्थक  पद होने से वाक्य का पूर्ण अर्थ नहीं निकल पाता , परन्तु कभी – कभी निरर्थक

 शब्द होने से भी अर्थ निकल आता है , ये सिर्फ अपवाद के रूप में है।

(2) योग्यता –  योग्यता का अर्थ होता है वाक्य में  सार्थक  शब्दों का प्रयोग होना चाहिए

उन शब्दों का वाक्य के प्रसंग के अनुसार अर्थ भी होना आवश्यक है। वाक्य के सभी

शब्दों का आपस में  मेल भी होना चाहिए।

 (3) आकांक्षा ————-                वाक्य अपने आप में पूर्ण होना चाहिए।

वाक्य में ऐसे शब्द की कमी ना हो जिस से वाक्य का अर्थ  स्पष्ट ना हो सके कुछ

अधूरा सा रहें  ऐसे वाक्य आकांक्षा के प्रतिकूल होते हैं। शब्द वाक्य को पूरा अर्थ दे सके।

पढ़ने के बाद पूरा अर्थ समझ में आ जाए  कुछ और जानने की इच्छा या आकांक्षा ना रहें।

(4) आसक्ति – वाक्यों में शब्दों का प्रयोग इस प्रकार करना चाहिए की शब्दों में निकटता

या आसक्ति हो। रुक – रुक के बोलने से वाक्य  के अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाते , उनके प्रयोग में

निरन्तरता  ज़रुरी  है। यदि कहीं रूकावट  या बदलाव दिखाना आवश्यक है तो  वहा  विराम-

चिन्हों का प्रयोग करना चाहिए।

MUST  READ – कारक और उसके भेद  


(5) पद – क्रम –  वाक्यों के सही अर्थ जानने के लिए शब्दों का सही क्रमों  में सजा रहना

आवश्यक है। वाक्य में शब्द सही क्रम में ना रहा तो  वाक्य का अर्थ समझ में नहीं आता।

(6) अन्वय – अन्वय का अर्थ होता है वाक्य में कर्ता , क्रम और क्रिया के लिंग , वचन और

पुरुष और कारक में   मेल होना आवश्यक है।  इसके अभाव में  अर्थ  स्पष्ट नहीं हो पाता।

संरचना के दृष्टि से वाक्य के  दो घटक होते है -:

 (1)  उद्देश्य (कर्ता)   (2) विधेय  (क्रिया )

(1) उद्देश्य (कर्ता)   (subject) –  अंग्रेजी में जो अर्थ  subject का है वही अर्थ  हिंदी में वही

स्थान उद्देश्य का है , अर्थात  वाक्य में जिसके वारे  में बोला जाता है उसे उद्देश्य कहा जाता है।

इसमें कर्ता  तथा कर्ता का विस्तार आ जाता है।

(2) विधेय (क्रिया ) (predicate ) –  अंग्रेजी में predicate जो अर्थ है वही अर्थ हिंदी में विधेय

का है।  वाक्य में उद्देश्य के विषय में जो कहा जाये   उसे विधेय कहा जाता है। इसमें  क्रिया

और क्रिया का विस्तार कर्म एवं कर्म का विस्तार आ जाता है।

उद्देश्य और विधेय के मेल से ही वाक्य की सरंचना पूर्ण होती है।  इसका उदाहरण निम्नलिखित

          उद्देश्य
                              विधेय
            मैं
                     बाजार जाता हूँ।
           सूरज
                 पूरव से निकल चुका है।
          लता
               कक्षा मैं  पढ़ाई करा रहीं है।
 कक्षा के सभी छात्र
                     शोर मचा रहें है।

इस से स्पष्ट है की वाक्य में कर्ता , कर्म , क्रिया एवं पूरक का  अपना – अपना स्थान होता है।

सभी शब्द वाक्य में आने के बाद व्याकरणिक  नियमों में बंध जाते हैं।

हम लोग उद्देश्य और उद्देश्य के विस्तार  एवं विधेय एवं विधेय के विस्तार को निम्नलिखित

समझेंगे।

उद्देश्य एवं उद्देश्य के विस्तार -:

       वाक्य
     उद्देश्य
 उद्देश्य का विस्तार
       विधेय
 बुद्धिमान विद्यार्थी ने इस गणित को हल कर दिया।
     विद्यार्थी
     बुद्धिमान
इस गणित को हल कर दिया।
 मेहनती  व्यक्ति हमेशा सफल होते है।
    व्यक्ति
      मेहनती
हमेशा सफल होते है।
 काली रात लम्बी होती है।
     रात
       काली
   लम्बी  होती है।
 काली भैस घास खा रही है।
     भैस
       काली
घास खा रही है।
 बहादुर सैनिकों  ने  सभी   आतंकवादियों      को ढेर कर दिया।
    सैनिकों
       बहादुर
 सभी आतंकवादियों
को ढेर कर दिया।
  विधेय का विस्तार -:
       वाक्य
      विधेय
 विधेय  का विस्तार
 उद्देश्य
 मैं  स्कूल जाता  हूँ।
जाता हूँ।
स्कूल
मैं
 अध्यापिका कक्षा में पढ़ा रहीं है।
 पढ़ा रहीं है।
 कक्षा
अध्यापिका
 लड़के मैदान में खेल रहे थे।
 खेल रहे थे।
 मैदान
 लड़के
लता पत्र लिखती है।
 लिखती है।    पत्र    लता

वाक्य के मुख्यतः  दो भेद होते है -:

( 1) अर्थ के दृस्टि से  (2) रचना के दृस्टि 
 
1) अर्थ के दृस्टि से  वाक्य के आठ (8) भेद होते है। 
(i) कथानात्मक /विधानवाचक  वाक्य
(ii ) नकारात्मक / निषेधवाचक  वाक्य
(iii) आज्ञार्थक / विधिवाचक  वाक्य
(iv) प्रश्नवाचक  वाक्य
(v) इच्छावाचक  वाक्य
(vi) संदेह वाचक वाक्य
(vii) विस्मयादिबोधक  वाक्य
(viii) संकेत वाचक वाक्य

(i) कथानात्मक /  विधानवाचक  वाक्य -:

ऐसा सामान्य वाक्य जो किसी व्यक्ति या  वस्तु के स्थिति या  अवस्था का बोध कराता हो
कथनात्मक  या विधानवाचक वाक्य कहते है। जैसे-
-लता  एक सेविका है।  मदन एक चिकित्सक है।  मैं कल कोलकाता जाऊँगा। आदि।

(ii) नकारात्मक /निषेधात्मक  वाक्य -:

ऐसे वाक्य जिसमे  “ना ” होने का बोध हो या जिस वाक्य में कथन का निषेध  किया जाता हो
उसे नकारत्मक या निषेधात्मक वाक्य कहते है।  जैसे -:
वह कल नहीं आएगा।    तुम खेलने मत जाओ।  लता बाजार नहीं जाएगी।  तुम क्यों नहीं पढ़ते हो।

आज्ञार्थक /विधिवाचक  वाक्य -:

जिस वाक्य में आज्ञा , निर्देश , प्रार्थना , या विनय आदि के भाव का पता चलता हो उसे आज्ञार्थक
या विधिवाचक  वाक्य कहते है।  जैसे -:
कृपया एक ग्लास  पानी दीजिए।  मेरे कक्षा से बाहर निकल जाओ।  आप उधर से ना जाये। आदि

प्रश्नवाचक वाक्य -:

जिस वाक्य में प्रश्न का बोध हो या किसी से प्रश्न पूछे जाते हो उसे प्रश्न वाचक वाक्य कहते है।
प्रश्नवाचक  वाक्य को सकारात्मक और नकारात्मक  दोनों रूप में लिखा जा सकता है।
जैसे -: तुम्हारा क्या नाम है ? वो कब आएगा ?  लता का भाई क्या करता है ?
 क्या तुम आज नहीं जाओगे ? आदि

इच्छावाचक वाक्य -:

जिस वाक्य में किसी के इच्छा , आशा , अथवा आशीर्वाद के भाव का पता चलता हो तो
 ऐसे वाक्य को इच्छावाचक  वाक्य कहते है।
जैसे – ईश्वर करे तुम खुश रहो।  तुम्हारा नव वर्ष  मंगलमय  हो।
  भगवान करे ,  इसबार में ज़रूर पास कर जाऊँ। आदि

संदेह वाचक वाक्य -:

जिस वाक्य में किसी के संदेह या सम्भावना का बोध कराता हो उसे संदेह वाचक
 वाक्य कहते है।  जैसे – शायद कल मैं नहीं आ पाऊंगा।    अब तक वह आ चुका
होगा।  शायद  आज वर्षा हो सकती है।

 विस्मयादिबोधक  वाक्य -:

जिस वाक्य में विस्मय (आश्चर्य ),हर्ष  , शोक , घृणा आदि के भाव को प्रकट होता
 है उसे विस्मयादिबोधक वाक्य कहते है। जैसे – ओह !कितना सुन्दर फूल है।
अरे !तुम यहाँ कैसे ?  अरे !वो  फिर फेल हो गया।  आदि।

संकेत वाचक वाक्य -:

जिस वाक्य में किसी पर संकेत किया जाता हो या  किसी कार्य को होने के लिए  शर्त

रखा जाता हो उसे संकेत वाचक या शर्त वाची वाक्य भी कहते है।

जैसे – अगर तुम  आ जाते  तो. मैं चला जाता।

यदि बारिश हो जाती तो ,मैं नहीं आता।

यदि राम आ जाता तो, तुम्हारा काम हो जाता।

वर्षा हुई होती तो , फसल अच्छा होता।

 

            रचना की दृस्टि से वाक्य के भेद -:

रचना के आधार पर वाक्य के तीन भेद है।
(1) सरल वाक्य
(2) संयुक्त  वाक्य

(3)मिस्र वाक्य

 

(1) सरल वाक्य -:(saral  vaky)

जिन वाक्यों में में एक विधेय हो अर्थात  एक ही क्रिया हो सरल वाक्य कहलाता है।

भले ही  कर्ता अर्थात उद्देश्य एक से अधिक हो  सरल वाक्य कहलाता है।

उदाहरण  के लिए -: लता खेल रहीं है।          ( एक उद्देश्य , एक विधये  )

लता और माला  रहीं है।  (दो उद्देश्य , दो विधेय  )

सरल वाक्य में  एक ही वाक्य होता है  और वाक्य में एक ही विधेय होता है।

वाक्य में यदि क्रिया अकर्मक है  तो उसमे कर्म नहीं आ सकता और यदि  सकर्मक

है तो ज़रूर आएगा  , अगर द्विकर्मक है तो दो कर्म आ सकते है।

जैसे – : मैं नहीं खेल रहा हूँ।

राजू ने रमन से सवाल वनवाया।

 

(2 ) संयुक्त वाक्य -:( sayunkt vaky)

जब दो या दो  अधिक उपवाक्य समुच्यबोधक अव्यय से जुड़े हुए हो उसे संयुक्त
वाक्य  कहते है।
जब दो या दो से  अधिक स्वतंत्र वाक्य किसी संयोजक के द्वारा जुड़े होते है ,  उसे
संयुक्त  वाक्य कहते है।
जैसे -: मैं जा रहा हूँ और तुम आ रहे हो।
          लता खा रही है और ममता पढ़ रही है।
 संयुक्त वाक्य में निम्नलिखित बातें का होना आवश्यक है।
(१)  संयुक्त वाक्य मैं सरल वाक्य का स्वतंत्र   प्रयोग  हो सकता है।
(२) दोनों वाक्य में  आपस में आश्रित  ना हो कर एक दूसरे के पूरक होते है।
(३) संयुक्त वाक्य में वाक्यों की रचना एक सामान होनी चाहिए , अलग – अलग
संरचना  से संयुक्त वाक्य नहीं बनता।
जैसे -: मैं खाना खा रहा हूँ  और घर घर जा रहा हूँ।
परस्पर  विपरीत बातें भी संयुक्त वाक्य में नहीं आ सकता।
जैसे -:   लता बहुत  कंजूस है और पैसा बहुत खर्च  करती है। `

संयुक्त वाक्य के निम्नलिखित प्रभेद होते है। 

(क ) संयोजक संयुक्त वाक्य      (ख) विभाजक संयुक्त वाक्य
(ग ) विरोधसूचक  संयुक्त वाक्य  (घ ) परिमाणवाची संयुक्त वाक्य

(क) संयोजक संयुक्त वाक्य -: 

जब वाक्यों को “और” , “तथा “, “एवं”  आदि समुच्यबोधक द्वारा जोड़ा जाता  है तो

उसे संयोजक संयुक्त वाक्य कहते है।

जैसे -: लता शिक्षिका है और उसका पति डॉक्टर।

वो पास हो गई एवं तुम फैल हो गए।

 

(ख )  विभाजक संयुक्त वाक्य -:

जिन दो वाक्यों के बीच विकल्प सूचक समुच्यबोधक शब्द का प्रयोग होता है उसे

विभाजक संयुक्त वाक्य कहते  है।

जैसे -: तुम देखते जाओ मैं बताता रहूँगा।

वर्षा नहीं होती तो मैं आ जाता।

(ग) विरोध सूचक वाक्य -:

जो वाक्य समुच्य सूचक से  बना होता है और विरोध की स्थिति प्रकट करता है  विरोधसूचक

वाक्य कहते है। जैसे -: वो पास हो जाता परन्तु मेहनत ही नहीं किया।

 

(घ)परिमाण वाची संयुक्त वाक्य -:

जब संयुक्त वाक्य कार्य -कारण – भाव से समुच्यबोधक द्वारा जुड़े हो परिमाण वाची
 संयुक्त वाक्य कहते है। जैसे – ऑफिस को बंद करना है , अतः कार्य को जल्दी सम्पन्न
करे।

मिस्र वाक्य – : |(|misr vaky)

मिस्र वाक्य में एक से अधिक वाक्यों  के मेल से बना होता है जिसमे एक वाक्य
 प्रधान वाकी वाक्य गौण  होते है।

मिस्र वाक्य में  एक प्रधान उपवाक्य  होता एवं उसपर आश्रित एक या एक

से अधिक उपवाक्य हो सकते है।

मिस्र वाक्य में वाक्यों के बीच समानता का सम्बन्ध  नहीं होता  आश्रय और

आश्रित का सम्बंन्ध  होता है।  इसमें एक प्रधान उपवाक्य होता है , जिसका

विस्तार या समर्थन दूसरा आश्रित वाक्य करता है।

जैसे -: ये वही लड़का है , जिसने मेरी घड़ी चुराई   थी।

राजेश को पुरुष्कार मिला क्योंकि वह कक्षा में प्रथम आया था।

मेरी कलम मिल गई जो खो गई थी।

रामु ने कहा था  कि वो मेरा घर आएगा।

 

    उपवाक्य (Clouse) -:

प्रधान वाक्य एवं उसपर आश्रित उपवाक्य की पहचान।
(क)  जिसकी वाक्य की  क्रिया मुख्य होती है उसे प्रधान वाक्य कहते है।
(ख) आश्रय उपवाक्यों  का प्रारंभ प्रायः यदि , जिसे , क्योंकि , जो , कि आदि से होता है।
(ग) मिस्र वाक्य में जो क्रिया वाक्य के अंत में बनी रहती है उसे उसे आश्रित उपवाक्य
कहते है।  जैसे -: लता जल्दी चलती तो अवश्य समय पर पहुंच जाती।
इसे सरल वाक्य में इस  प्रकार  बदलेंगे -:
लता जल्दी चलने पर अवश्य समय पर पहुंच जाती।
यहाँ  “जल्दी चलती” क्रिया  रूपांतरित  हो गई है  अतः इसे आश्रित उपवाक्य कहेंगे।
दूसरी तरफ “पहुंच जाती”  क्रिया कोई बदलाब नहीं हुआ है अतः इसे प्रधान उपवाक्य कहते है।

उपवाक्य के निम्नलिखित  तीन भेद होते है

  • संज्ञा उपवाक्य ( Noune clause )
  • विशेषण  उपवाक्य (Adjective clause )
  • क्रियाविशेषण उपवाक्य (Adverbial clause )
  • संज्ञा उपवाक्य
जो  प्रधान उपवाक्य वाक्य के संज्ञा या संज्ञा पदबंध के स्थान पर आता हो उसे संज्ञा 
 
पदबंध कहते है।  जैसे -: भारत ने कहा कि हम लड़ाई  नहीं चाहते। 
 

भारत ने कहा ( उपवाक्य का कर्म )  हम लड़ाई नहीं चाहते ( उपवाक्य )

  • विशेषण उपवाक्य -:
यदि कोई  आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के संज्ञा या  सर्वनाम  की विशेषता 
 
बतलाता हो जैसे -: यह सफ़ेद गाय है जो बहुत सुन्दर  है। 
 
                             यह वही है जो , कक्षा में प्रथम आई थी।          
       ” जो बहुत सुन्दर है ” एक ऐसा आश्रित वाक्य है जो की सफ़ेद गाय (संज्ञा )
 
    की  विशेषता बतलाता है। 
 
दूसरे वाक्य में “कक्षा में प्रथम आई थी ऐसा आश्रित उपवाक्य है जो वही (सर्वनाम )
 
की वियशेषता  विशेषता बताता है।  
 
  •  क्रिया विशेषण उपवाक्य  -:

यदि किसी वाक्य में आश्रित उपवाक्य प्रमुख उपवाक्य के क्रिया का विशेषता बतलाता

हो उसे क्रिया विशेषण उपवाक्य कहते है।

जैसे -: यदि बोलना नहीं आता , तो  चुप रहना चाहिए।

जब में स्टेशन पहुंचा  तो ट्रैन जा चुकी थी।

क्रिया विशेषण उपवाक्य के पांच भेद है। 

(१) काल वाचक –  तुम्हारे आने के पहले वो जा चुका था।

जैसे ही मैं घर पहुंचा  बारिश छूट चुकी थी।

(२)   स्थानवाचक –  तुम जहाँ पढ़ते हो मेरा बेटा भी वहीं पढ़ता है।

तुम जिधर जा रहे हो , मैं पहले उधर चुका हूँ।

(३)  रीतिवाचक –    तुम वैसा ही करते जाओ , जैसा  मैं करता जाता हूँ।

बच्चे वही सीखते है , जो वे बड़ों को करते देखते है।

(४) परिमाणवाचक –  जितना  चीनी डालोगे  चाय उतनी मीठी होगी।

तुम जितना पढ़ाई करोगे , उतना ही अच्छा नंबर आएगा।


  (५)  हेतुसूचक वाक्य (परिणाम वाचक वाक्य) – यदि पढ़ते तो पास अवश्य होते।

मेहनत करेंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी।


इसके अलावे क्रिया विशेषण वाक्य के दो और भेद बताएं गए है।

कारणसूचक – ऐसा उपवाक्य जिसमे क्रिया के होने या ना होने का बोध  कराता हो ,

कारण सूचक क्रिया विशेषण उपवाक्य कहते है।

जैसे – वो प्रथम आई है  क्योंकि उसने बहुत मेहनत की थी।

प्रयोजन सूचक – जिस उपवाक्य से क्रिया के उद्देश्य अथवा प्रयोजन का  पता चलता हो

उसे प्रयोजन सूचक क्रिया विशेषण उपवाक्य कहते है।

जैसे – तुम अच्छे से पढ़ाई करो ताकि अच्छे नंबरों से उत्तरीन हो सको।

जल्दी चलो ताकि ट्रैन पकड़ सको।

 प्रेरणार्थक वाक्य 

जिस वाक्य में कर्ता स्वंय  से  क्रिया  करके किसी ओर से करवाता हो उसे प्रेरणार्थक
वाक्य कहते है।
दूसरे शब्दों में कहे तो जब कोई व्यक्ति दूसरे के प्रेरणा से कार्य को करता हो तो

प्रेरणार्थक वाक्य कहलाता है।

प्रेरणार्थक क्रिया के दो भाग होते है।

(क) प्रथम प्रेरणार्थक  -: इसमे  दो कर्ता  होता है प्रथम करने वाला  और दूसरा कराने

वाला  अर्थात सहायता करने वाला जैसे –  शिक्षिका बच्चों को पढ़ना सीखा रही है।

बच्चों ( कर्ता )जिसने सीखा

शिक्षिका (प्रेरक कर्ता ) जिसके कहने से सिखाने का कार्य किया गया।

द्वितीय प्रेरणार्थक वाक्य – इस प्रकार के वाक्य में पहला प्रेरक कर्ता  कार्य को करने के लिए

किसी दूसरे प्रेरक कर्ता की सहायता लेता हो।

जैसे -: मैंने उसे उसके पिता जी से डाट  खिलवाई।

वाक्य बोधक वाक्य रचना -:  जिस  वाक्य  में  कर्ता क्रिया के करने के लिए सामाजिक

, राजनीतिक , धार्मिक , प्रशासनिक  दवाव होता  है।

जैसे -: अब  आपको चलना ही पड़ेगा।

सभी  को गुरु का आदर करना चाहिए।

प्रछन्न वाक्य ( लघु वाक्य) -:  कोई  संवाद पूर्ण रूप से  वाक्य  ना लगते  हुए भी एक पुरे

वाक्य के  तरह अर्थ प्रकट करता हो उसे लघु वाक्य कहते है।

जैसे – प्रश्न – तुम्हारा नाम क्या है ?

उत्तर – दिनेश।

प्रश्न -तुम  कहा से आ रहे हो ?

उत्तर – मुंबई।

उपर्युक्त  संबाद में  दिनेश से अभिप्राय है , मेरा  नाम दिनेश है।

मुंबई से  आशय  है कि मैं मुंबई से आ रहा हूँ।

लघु वाक्य तीन प्रकार के होते है।

अध्याहार के कारन बने लघु वाक्य -: इस वाक्य में वक्ता  कहना चाहते हुए भी शब्दों का

लोप कर देता है।

सामाजिक सम्प्रेषण में  प्रयुक्त लघु वाक्य -:कुछ वाक्य  सामाजिक व्यवहार में  लघु

रूप में प्रचलित है।    .जैसे –  नमस्ते , प्रणाम , जी , साहव  , हेलो , शुक्रिया , आदि

उद्गारात्मकता लघु वाक्य –  जीन शब्दों से वक्ता अपने उदगार व्यक्त करता हो उसे

उद्गारत्मकता  लघु वाक्य कहते है।

जैसे -: सुन्दर !   ,  क्या खूब ! , चोर  जेल  से फरार !  , लाओ तो जाने !  आदि

और अधिक जानने के लिए नीचे CLICK करें -:

(i) संधि 

(ii) संज्ञा

 (iii ) कारक

  (iv) अव्यय  

(V) विशेषण 

(VI) उपसर्ग एवं प्रत्यय 

(VII) समास 

(VIII) शब्द विचार 

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