उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए और उसके भेद एवं उदाहरण

उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए और उसके भेद एवं उदाहरण

प्रश्न – उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए और उसके भेद एवं उदाहरण

उत्तर- किसी भी शब्द का अर्थ तब बदल जाता है जब उसके आगे या पीछे लग
जाता हो , शब्द के आगे लगने बाले शब्द उपसर्ग एवं शब्द के बाद मे लगने बाले
शब्द प्रत्यय कहलाता है ।
  1. इसे भी पढे संधि और उसके भेद

उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए

     (उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए) 

शब्दों के वो अंश जो किसी शब्द के पहले लग कर शब्द का अर्थ ही बदल देता है , उपसर्ग कहलाता
है। जैसे – अप +यश = अपयश   । यहाँ अप एक शब्दांश है जो एक शब्द यश के आगे लग कर शब्द
का अर्थ बदल दिया है। शब्द को वाक्य में  स्वतंत्र रूप से प्रयोग किया  सकता है , परन्तु शब्दांश को
स्वतंत्र रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। शब्दांश तो केवल वो होता है जो शब्द के आगे लग कर
शब्द का अर्थ बदल सके। शब्दांश शब्द के आगे लगता है , उपसर्ग कहलाता है।
जैसे – अनु +शाशन = अनुशाशन  ,  परि + णाम = परिणाम  , नि + रोध = निरोध
हिन्दी भाषा में उपसर्ग के मुख्यतः तीन भेद होते है –  (i) तत्सम   (ii) तद्भव  (iii) विदेशज
(उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए)
तत्सम उपसर्ग – हिन्दी में  तत्सम उपसर्ग  संस्कृत से आए हैं । संस्कृत में  कुल 22 उपसर्ग
है । जो निम्नलिखित है -:
उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए
 उपसर्ग  अर्थ  उदाहरण
 1 .  अति  अधिक / ज्यादा  अतिकोमल , अत्यधिक , अत्याचार , अतिक्रमण , अतिरिक्त आदि ।
 2.  अधि ऊपर अधिपति , अधिकृत , अधिवास ,

अध्ययन ,  अधिपति  आदि

3 .   अनु  पीछे , छोटा , बराबर  अनुगमन , अनुसार , अनुकूल , अनुराग , अनुज आदि ।
 4 . अप  बुरा  अपमान , अपवाद , अपकार , अपहरण , अपशकुन आदि ।
 5 .  अभि  सामने  अभिलाषा , अभिनय , अभिनव अभ्यास , अभिवादन आदि ।
 6 . अव हीन , बुरा  अवज्ञा , अवसर , अवतरण , अवगुण , अवतार आदि ।
 7 . आ तक  आगमन , आजीवन , आचरण , आजन्म , आदान आदि ।
 8 . उत् ऊँचा उच्चारण , उद्धार , उत्थान ,उन्नयन , उन्नति आदि ।
 9 . उप नज़दीक, पास , समान  उपमान , उपकार , उपहार , उपचार , उपभेद आदि ।
 10 . दुर / दूस्  बुरा  दुर्घटना , दुराग्रह , दुर्गुण , दुर्बल , दुर्घटना आदि ।
 11 . निस रहित ,बिना निर्धन , निष्काम , नियम ,निहार ,निराशा आदि ।
 12 .  नि  नीचे , निषेध  निबंध , निहार , निपात , निरोध ,निगमन आदि ।
 13 . परा उल्टा , नाश पराधीन , पराक्रम , पराजय ,पराभूत आदि ।
 14 . परि चारो और परिवर्तन  ,परिवार , परीक्षा , परिचालक , पर्यटन आदि ।
 15  . प्र आगे , अधिक प्रलय , प्रक्रिया , प्रमाण , प्रयत्न , प्रताप , प्रस्ताव , प्रचार आदि ।
 16 . प्रति विरुद्ध प्रतिदिन , प्रतिवाद ,प्रतिदान ,प्रतिरूप ,प्रतिहिंसा  आदि ।
 17 . वि अलग , विशिष्ट विज्ञान , विमुख , विरोध , विकल ,विजय , विनय आदि ।
 18 . सम् पूरा ,साथ संजय , संतुलन , संग्राम , संगति , संकल्प आदि ।
 19 . सु अच्छा सुफल , सुदूर , सुपात्र , सुपथ , सुजन आदि ।
 20 . अन्  नहीं  अनुपयुक्त , अनुपम ,अनागत आदि ।
 21. निर् नहीं  निर्दोष , निराश , निरोग , निर्धन आदि ।

 

संस्कृत के कुछ एसे शब्द या शब्दांश  जो समास रचना  के पहले भाग में आते इतने  अधिक

प्रचलित हो गए कि हिन्दी में इन शब्दों का प्रयोग उपसर्ग की तरह होने लगा जिसे हम निम्नलिखित
 रूप में देख सकते हैं ।
अंतः –  अंतःकरण ,अंतःपुर , अंतर्ध्यान आदि
अ (अभाव )- अज्ञान , अकाल , असुंदर , अकाल
अधः – अधःपतन ,   अधोगति , अधोपतन
अलम्  (बहुत )- अलंकार
कु (बुरा )- कुपुत्र , कुरूप , कुपात्र , कुमति ।
चिर (बहुत देर ) – चियायु , चिरजीवी , चिरकाल , चिरकुमार  ।
पर (दूसरा ) – परदेश , परलोक , पराधीन ।
पुनर् (फिर से ) – पूर्णविवाह , पूर्णविचार
पुरस् – पुरस्कार
उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए

                                                             तद्भव उपसर्ग

 
तद्भव उपसर्ग संस्कृत का ही रूप बदल कर हिन्दी में आ गया तद्भव उपसर्ग कहलाता
है।  हिन्दी के कुछ प्रमुख तद्भव उपसर्ग  निम्नलिखित है ।
उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए और उसके भेद एवं उदाहरण
उपसर्ग एवं प्रत्यय
अन – अनहोनी , अनपढ़ , अनबन  , अछूत , अटल , अमोल , अटल ,अनकहा , अजान ।
उन (कम ) – उनचास , उनसठ , उनचालीस ।
औ – औगुन , औघट ।
नि (रहित )- निडर , निपूता , निकम्मा ।
पर –  परनाना , परदादा , परपोता
सु –  सुफल , सूजन, सुडौल ।
अध (आधा )- अधमरा , अधकचा , अधजला ।
दु – दुलारा , दुबला , दुधारू ।
बिन – बिंमांगे , बिनजाने , बिनखाये
भर – भरपेट , भरपूर , भरमार ।
चौ –  चोपई , चौराहा , चौपाया

                                        विदेशी उपसर्ग 

वो विदेशी भाषाओं से जो शब्द  हिन्दी  में आ गए हो उसे विदेशी उपसर्ग कहते है ।

कुछ भाषाओं के उपसर्ग निम्नलिखित है ।

 

अरबी – फारसी  के उपसर्ग -:

सर -(मुख्य )- सरपंच , सरताज

बद (बुरा ) – बदसूरत , बदनाम , बदबू , बदमाश ।

ना (अभाव ) – नापसंद , नाराज , नाबालिग , नाकारा ।

ला (नहीं) – लापरवाह , लाइलाज , लावारिस ।

हम (साथ )- हमउम्र , हमवतन , हमसफर ।

कम (थोड़ा )-कमजोर , कमउम्र  , कमअक्ल ।

उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए

            कहीं – कहीं पर एक से अधिक उपसर्गों का प्रयोग होता है ।

कुछ उदाहरण निम्नलिखित है ।
पर्यावरण = परि + आ +वरन
समाचार =सम् +आ + चार
अत्याचार = अति +आ +चार
समालोचना = सम् + आ + लोचना
(उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए) उपसर्ग एवं प्रत्यय सम्पूर्ण व्याख्या

(i) कभी -कभी एक उपसर्ग के अलग -अलग अर्थ होता है कभी -कभी तो इसका अर्थ

बिल्कुल उल्टा हो जाता है । जसे – ‘नि ‘ से  नि + षेध  और  नि+यम  दोनो बनता है ।

एवं वि से विशिष्ट ( वि + शिष्ट ) एवं वियोग (वि +योग ) दोनो बनता है ।

(ii) कुछ तत्सम उपसर्ग के अर्थ तो समान होते है परंतु रूप भिन्न -भिन्न हो सकते है ।

जैसे -दुर् , दुस् , छ , नि , ष , निर् , निस्  से बनने बाले शब्द कुछ इस प्रकार है –

दुर्भग्य , दुस्साहस , उच्छ्वास , निर्जन आदि ।

(iii) तत्सम , तद्भव  और विदेशज शब्द जरूरी नहीं है कि उसी कोटी के शब्द के साथ

प्रयुक्त हो ये किसी दूसरे कोटी में भी प्रयुक्त हो सकते है जैसे – “अप ” उपसर्ग  “अपजस

में प्रयोग होता है , अपयश में भी , उसी प्रकार “अन ” तद्भव उपसर्ग अनजान  और अनबध

दोनो में प्रयुक्त होता है ।

(iv) उपसर्ग के प्रयोग होने से शब्द में कभी व्याकरण कोटी में बदलाब होता है कभी नहीं ।

जैसे – अन+पढ़ = अनपढ़ , अ+ज्ञात = अज्ञात इसमे व्याकरण कोटी में अंतर आया है ,जबकि

अन+होनी = अनहोनी , भर+पुर = भरपूर भर+मार = भरमार के व्याकरण कोटी में कोई

बदलाब नहीं  हुआ ।

                                                प्रत्यय   

कुछ  शब्द के अंत में लगने बाले  शब्दांश जिस से शब्द का अर्थ बदल जाता है , प्रत्यय

कहलाता है । जैसे – पहल +वान (प्रत्यय ) = पहलवान

अत: हम कह सकते है कि जो शब्दों के अंश शब्दों के अंत में लग कर उस शब्द का अर्थ

बदल दे प्रत्यय कहलाता है । जैसे – सजावट = सजा +वट , होनहार =होन +हार आदि ।

प्रत्यय को दो भागो में बाटा जा सकता हैं , (i) कृत प्रत्यय  (ii) तद्धित प्रत्यय ।

कृत प्रत्यय -: 

जो प्रत्यय क्रिया के मूल धातु-रूप के साथ मिलकर संज्ञा अथवा विशेषण का निर्माण
करता हो कृत प्रत्यय कहलाता है । जैसे – होन +हार = होनहार , इसमें हार प्रत्यय है ।
 शब्द  धातुरूप  प्रत्यय
 लेनदार लेना  दार
 होनहार  होन हार
 उड़ान उड़ आन
 दुकानदार दुकान दार
 सजावट सज आवट
 पहलवान पहल वान
 गवैया गा वैया
प्यास  पी आस
खिलौना खेल  औना
तैराक  तैर आक
भुलक्कड़ भूल अक्कड़
पढ़नेवाला पढ़ने वाला
बुलावा बोल आवा
नाशकारी नाश कारी
भूला भूल
चालक चाल अक
लिखकर  लिख कर
मिलाप मिल आप
क्रिड़ा क्रीड़

           कुछ कृत प्रत्यय एवं एवं उससे बने कुछ शब्द ।

अन — ढक्कन , चिन्तन

— हँसी , बोली , धमकी

आलू – ईष्यालु , झगड़ालू , दयालु

आक – चालाक , तैराक

आस –प्यास , छपास 

आवट – सजावट , मिलावट , लिखावट , बनावट

आहट –  घबराहट , चिल्लाहट

आकू –लड़ाकू , पढ़ाकू

आका –  लड़ाका

आवना – डरावना , सुहावना

ऊ —  चालू , झाड़ू

अंत – रटंत , गढ़ंत

आ – सोचा  , पढ़ा , लिखा , कहा

आवा – दिखावा , पहनावा

ऐत –  डकैत , लठैत 

आई –  पिटाई , कमाई

संस्कृत के कृत प्रत्यय 

अन – करण , चलन , जलन

अना – कामना , प्रार्थना

उक – भावुक ,

र –नम्र , 

ता – वक्ता , नेता , दाता

क – कारक , सेवक , गायक

ति- शक्ति , नीति , गति

तद्धित प्रत्यय

जो प्रत्यय क्रिया के धातु रूपो को छोड़ कर संज्ञा , सर्वनाम और विशेषण सुचक शब्दों
के साथ जुडते है , तद्धित प्रत्यय कहलाते है । जैसे – हिंदुस्तान+ ई = हिंदुस्तानी यहाँ
ई  तद्धित प्रत्यय है क्योंकि हिंदुस्तान  नामक संज्ञा के साथ मिलकर नया शब्द बना
है ।

हिन्दी में प्रयुक्त होने वाले तद्धित प्रत्यय -:

आहट – घवराहट , चिकनाहट

ड़ा – मुखड़ा , दुखड़ा

आ – प्यासा , भूखा ,

कार – कहानीकार , स्वर्णकार , पत्रकार , इतिहासकार

आनी -पंडितानी , नौकरानी , जेठानी

आरी – बीमारी , जुआरी  , पुजारी

गुना -दोगुना , तीनगुना , चौगुना 

ची – तोपची , खजांची

गर – जादूगर , कारीगर

ईन – नमकीन , रंगीन

इक-  समाजिक , धार्मिक  

आस  –खटास, मिठास  

 

संस्कृत  में प्रयुक्त होने वाले तद्धित प्रत्यय -:

अ –शाक्त

आलु  – दयालु , कृपालु 

इमा –महिमा , लालिमा

तम –घोरतम ,श्रेष्ठतम

ता- महानता , एकता , मानवता 

मान –श्रीमान , शक्तिमान 

इल –जटिल , धूमील

 

उर्दू में  प्रयुक्त होने वाले तद्धित प्रत्यय -:

साज – जालसाज  

ईश – कोशिश , आजमाइश

आना – सालाना , मेहनताना 

ईना – कमीना , पसीना , महीना

दान –  कमलदान , पीकदान

ई –  आमदनी

 

हिन्दी में शब्द रचना में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का प्रयोग होता है

 और इससे नए शब्द की रचना होती है । 

 उपसर्ग मूलशब्द   प्रत्यय  निर्मित शब्द
 निर् दया निर्दयी
परि पूर्ण  ता  परिपूर्णता
 दुस्  साहस  ई   दुस्साहसी
 अनु  मान  इत  अनुमानित
 अप  मान  इत  अपमानित
 अभि  मान  ई  अभिमानित
 उप  कार  क  उपकारक
 अ  धर्म  इक  आधर्मिक
 बद  चलन  ई  बदचलनी

हमने  क्या सिखा -:

उपसर्ग एवं प्रत्यय की परिभाषा बताइए

* उपसर्ग एवं प्रत्यय से शब्द का निर्माण होता है ।

*  उपसर्ग ऐसे शब्दों के अंश है , जो शब्द के आगे लगकर शब्दों का अर्थ बदल देते है ।

* उपसर्ग तीन प्रकार के होते है । – तत्सम , तधभव , विदेशज ।

* प्रत्यय ऐसे शब्दों के अंश है  , जो शब्दों के अंत में लग कार शब्द का अर्थ बदल देता है ।

* उपसर्ग और प्रत्यय का  स्वतंत्र प्रयोग नहीं हो सकता ।

   TO KNOW MORE 

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